मारपीट की घटना व्यवस्था पर लगा रहे हैं सवालिया निशान – आईएमए

रायपुर
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन छत्तीसगढ़ (आईएमए) ने भी आम्बेडकर अस्पताल की घटना के खिलाफ आवाज उठाई है। अध्यक्ष डॉ. महेश सिन्हा ने कहा कि अस्पताल में हुई घटना से कई प्रश्न चिन्ह खड़े हो चुके हैं। सुदूर अंचल से रास्ते में पड?े वाले मेडिकल कॉलेज को छोड़कर अगर सभी को रायपुर आना पड़े तो यह एक गंभीर स्थिति है। स्वास्थ्य विभाग को इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

जिला अस्पताल जिन्हें खुद को एक रेफ?ल सेंटर के रूप में विकसित होना चाहिए, वह भी अगर मरीजों को रायपुर भेजते रहे तो ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था का क्या औचित्य है। इस तरह की घटनाएं लगातार घटती रहती हैं, लेकिन उनके निराकरण के उपाय ढूंढने के बजाय कागजी जांच की कार्रवाई करके इति कर ली जाती है।

डॉ. महेश ने कहा कि जैसा की सभी को पता है कि सरकारी अस्पताल में कोई भी जांच करवाने के लिए हफ़्तों या महीनों का समय मरीज को दिया जाता है। जबकि यही जांच निजी क्षेत्र में ज्यादातर उसी दिन हो जाती है, क्या इस तरह की व्यवस्था सरकारी अस्पताल में नहीं हो सकती है।

राज्य में नए मेडिकल कॉलेज खोलने की बात हो रही है, जबकि वर्तमान के ज्यादातर कालेज अभी तक पूर्ण रूप से कार्यरत नहीं है। कोरोना काल में यह बात और खुले रूप से सामने आई है। सरकार को निजी अस्पतालों का सहयोग लेना पड़ा। एक और अजीबो ग?ीब स्थिति पैदा हुई है कि अब विभिन्न जांचों पर भी राज्य में सरकारी नियंत्रण है, जबकि अन्य राज्यों में यह आसानी से उपलब्ध हैं। बाहर की लैब यहां से सैंपल लेकर दूसरे राज्यों में जांच करके रिपोर्ट दे रही हैं।

जहां तक पुलिस या जेल प्रहरियों की बात है तो हमारा देश अभी भी ब्रिटिश काल में चल रहा है। इसमें कोई शक नहीं है कि पुलिस कर्मियों के मानवाधिकार की ज्यादा बात नहीं होती है। अन्य सुरक्षा बलों में भी आत्महत्या की घटनायें सामने आती रहती है, जिस पर ध्यान देने और कारणो का पता लगाकर निराकरण की आवश्यकता है।

कुछ राज्यों में अस्पताल में अलग से जेल वार्ड हैं, जहां जेल के मरीजों को लाकर रखा जाता है और समय मिलने पर ही उन्हें जांच स्थल पर ले जाया जाता है। कैसी भी परिस्थिति पैदा हो कानून के रखवालों को कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए। सरकारी चिकित्सक और पुलिसकर्मी को हमेशा विभिन्न कारणों से रोज साथ काम करना पड़ता है। इसमें आपसी सद्भाव बनाए रखने की आवश्यकता है।

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