सीएम फेस देकर मास्टर स्ट्रोक की तैयारी में कांग्रेस

लखनऊ
उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दल ब्राह्मणों का लुभाने में लगी हुई है। एक तरफ जहां बीजेपी-बीएसपी-सपा ब्राह्मणों को लुभाने के लिए प्रबुद्ध सम्मेलन करवा रही है वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस भी अपनी रणनीति में लगी हुई है। कांग्रेस की यूपी प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी अब पूरी तरह से चुनावी मोड में आ गई हैं। जिस तरह से लखीमपुर खीरी कांड के बाद पूरी कांग्रेस एक साथ योगी सरकार के खिलाफ यूपी में उतरती दिखाई दी उससे बीजेपी को भी बैकफुट पर आने के लिए मजबूर कर दिया। कांग्रेस के रणनीतिकारों की माने तो कांग्रेस अंदरखाने यह तय कर चुकी है कि यूपी में ब्राह्मण चेहरा बतौर सीएम फेस देना है। लेकिन चेहरा कौन होगा अभी तय नहीं हो पाया है चेहरे को लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। 

कांग्रेस के एक राष्ट्रीय सचिव ने बताया कि यह तो तय है कि कांग्रेस चुनाव से पहले ब्राह्मण चेहरा सीएम फेस के तौर पर देने जा रही है। बस नाम को लेकर संशय बना हुआ। कुछ नाम अंदर के हैं जिनपर विचार चल रहा है कुछ बड़े नेता अन्य दलों से आने वाले हैं। उनके नाम पर भी विचार चल रहा है। इसको लेकर शीर्ष नेतृत्व जल्दी ही कोई अंतिम निर्णय लेगा। नवंबर तक इस पर फैसला लिया जा सकता है। 

सीएम फेस देकर विपक्षियों पर दबाव बना सकती है कांग्रेस राष्ट्रीय सचिव ने बताया कि, ''दरअसल पार्टी ब्राह्मण चेहरा घोषित करने में फायदा देख रही है। एक तो सभी राजनीतिक दल ब्राह्मणों को लुभाने में लगे हुए हैं। सपा, बसपा और बीजेपी सभी अलग अलग नाम से सम्मेलनों का आयोजन कर रहे हैं। योगी जी बीजेपी का बड़ा ठाकुर चेहरा बन चुके हैं। लेकिन पिछले साढ़े चार साल में उनकी सरकार ने ब्राह्मणों का काफी अत्याचार किया। इसको लेकर बीजेपी में भी अंदरखाने काफी गुस्सा है। ब्राह्मण चेहरा घोषित कर कांग्रेस यूपी में एक लीड ले सकती है। इससे ब्राह्मण समुदाय को यह करने में आसानी होगी कि उनका क्या रुख होगा। दूसरा एक बार सीएम चेहरा प्रोजेक्ट होने के बाद कांग्रेस दूसरे दलों पर चुनाव से पहले चेहरा घोषित करने का दबाव बना सकती है।''

 प्रियंका के दौरे के समय भी उठा था ब्राह्मण चेहरे का मुद्दा कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी सुबह से ही लगातार बैठकें कर रही हैं। हालांकि इससे पहले पिछले महीने भी लखनऊ आईं थीं। कांग्रेस के सूत्रों का दावा है कि चुनावी अभियान को तेज करने पहुंची प्रियंका के सामने उस समय असहज स्थिति उत्पन्न हो गई जब कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी और प्रदेश अध्यक्ष लल्लू सिंह आमने-सामने आ गए। सूत्रों का दावा है कि प्रमोद तिवारी चाहते थे कि कांग्रेस की तरफ से सीएम का चेहरा प्रोजेक्ट किया जाए लेकिन अजय कुमार लल्लू इसके खिलाफ थे। दोनों गुटों के बीच टकराव को देखते हुए प्रियंका गांधी ने किसी तरह से मामले को संभाला और इसको आगे के लिए टाल दिया। दो गुटों की लड़ाई में तीसरे या बाहरी की लग सकती है लॉटरी कांग्रेस के सूत्रों की माने तो ब्राह्मण चेहरा देने की कवायद पिछले कई महीने से पार्टी के भीतर चल रही है। इसको लेकर प्रियंका की पिछली बैठक में चर्चा भी हुई थी। लेकिन यूपी में कांग्रेस में दो खेमे होने की वजह इस पर चर्चा नहीं हो पाई। 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी एक तरफ हैं तो दूसरी तरफ प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू का खेमा है। दोनों के बीच अंदरखाने खींचतान जारी है। इस बीच कांग्रेस ने अन्य नामों पर भी विचार करना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि बीजेपी के एक बड़े ब्राह्मण नेता की भी जल्द ही कांग्रेस में जवाइनिंग हो सकती है। विवाद से बचने के लिए किसी तीसरे नाम पर आलाकमान मोहर लगा सकता है। यूपी में क्या है ब्राह्मण वोटों का समीकरण दरअसल, यूपी की सामाजिक राजनीति कैसे काम करती है, इसका गणित समझने के लिए जनसंख्या के विभाजन को समझना जरूरी है।

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