पटना
बिहार में खनिज पट्टों की बंदोबस्ती को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब बालू, पत्थर या किसी अन्य विशिष्ट लघु खनिज के लिए एक व्यक्ति राज्यभर में कुल मिलाकर 200 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल का खनिज पट्टा नहीं रख सकेगा। सरकार ने बिहार खनिज नियमावली, 2019 में दूसरा संशोधन किया है।
अलग जिलों में भी नहीं बढ़ा सकेंगे 200 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र
संशोधित नियम में स्पष्ट किया गया है कि 200 हेक्टेयर की सीमा किसी एक जिले तक सीमित नहीं होगी।
राज्य के अंदर बालू, पत्थर और अन्य विशिष्ट लघु खनिज के लिए एक व्यक्ति के नाम पर मौजूद सभी खनिज पट्टों का कुल संयुक्त क्षेत्रफल इस सीमा में शामिल होगा।
पत्थर खदानों के भूखंडों को जोड़ने और बांटने का रास्ता साफ
सरकार ने पत्थर खदानों की बंदोबस्ती के लिए भूखंडों को आवश्यकता के आधार पर जोड़ने या छोटे टुकड़ों यानी खंडों में बांटने का भी प्रावधान किया है।
संशोधन का उद्देश्य खनिज पट्टों के बड़े पैमाने पर एक ही व्यक्ति के पास केंद्रित होने पर रोक लगाना है।
नीलामी जीतने के पांच दिन में जमा करनी होगी 25 प्रतिशत राशि
खान एवं भू-तत्व विभाग से मिली जानकारी के अनुसार नीलामी प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है। सफल उच्चतम बोलीदाता को नीलामी के पांच कार्य दिवस के भीतर नीलामी राशि का 25 प्रतिशत जमा करना होगा। संशोधन के बाद विभाग ने इस संबंध में विस्तृत आदेश जारी कर दिया है।
असफल बोलीदाता को 10 दिन में वापस होगी अग्रधन राशि
विभाग को असफल बोलीदाता की अग्रधन राशि अधिकतम 10 दिनों के भीतर वापस करनी होगी।
वहीं प्रतिभूति राशि पट्टा अवधि समाप्त होने के बाद लौटाई जाएगी। हालांकि इसके लिए यह शर्त होगी कि पट्टाधारक भुगतान में डिफाल्टर न हो।
बिहार में क्रशर लगाने के लिए बढ़ाया गया दायरा
खान एवं भू-तत्व विभाग के अनुसार पट्टाधारक अब पट्टा क्षेत्र की सीमा से अधिकतम दो किलोमीटर की परिधि में मोबाइल क्रशर सहित क्रशर स्थापित कर सकेंगे। इसके लिए विभाग की ओर से निर्धारित शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा।
निर्माण स्थल के पास भी मिल सकेगी क्रशर की अनुमति
निर्माण स्थल से 500 मीटर की परिधि में निर्माण कार्य से सीधे जुड़े संवेदक को भी क्रशर स्थापना की अनुमति दी जा सकेगी।
इसके लिए संबंधित कार्य विभाग की अनुशंसा जरूरी होगी। नियमावली में इस संबंध में आवश्यक प्रविधान किए गए हैं।