सीएम मोहन यादव ने बदलते दौर में एआई की बढ़ती हैसियत पर बात की, आज के समय में यह अत्यंत प्रासंगिक विषय है

नई दिल्ली/भोपाल
दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में शनिवार को 'सोशल इंप्लीकेशंस ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' पर सेमिनार आयोजित किया गया। इस सेमिनार में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद शामिल हुए। सीएम मोहन यादव ने बदलते दौर में एआई की बढ़ती हैसियत पर बात की। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि आज के समय में यह अत्यंत प्रासंगिक विषय है जिस पर विस्तार से चर्चा की गई है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हम जन कल्याण और सुशासन के लिए विज्ञान आधारित प्रणालियों का उपयोग करने की दिशा में काम कर रहे हैं, साथ ही आवश्यक सावधानियां भी सुनिश्चित कर रहे हैं। ऐसे महत्वपूर्ण विषयों को सामने लाना सराहनीय है। मैं इस पहल के लिए बधाई देता हूं।

सीएम यादव ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस कार्यक्रम की झलकियां साझा कीं। जिसमें से एक में वे एआई को लेकर फैले भ्रम पर बात करते दिखे। उन्होंने कहा, "जब कंप्यूटर और इंटरनेट आए, तो लोगों को डर था कि नौकरियां चली जाएंगी और घर बर्बाद हो जाएंगे। हर चीज में अच्छी और बुरी बातें होती हैं। वैसे ही, एआई में भी अच्छाई और बुराई दोनों हैं। यह हम पर निर्भर करता है कि हम इसका उपयोग कैसे करते हैं।"

इससे पहले मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने पोस्ट में लिखा, "'सोशल इंप्लीकेशंस ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' विषय पर इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित संगोष्ठी में सहभागिता कर प्रबुद्धजनों के समक्ष अपने विचार साझा करने का अवसर प्राप्त हुआ। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आज केवल तकनीक नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बन चुकी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि एवं शासन-प्रशासन जैसे विविध क्षेत्रों में एआई की संभावनाएं अनंत हैं। जब सम्पूर्ण विश्व एआई में अपना भविष्य तलाश रहा है, तब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एआई के वैश्विक पावरहाउस के रूप में उभर रहा है। निश्चित रूप से यह तकनीकी क्रांति "विकसित भारत 2047 के विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि में अहम भूमिका निभाएगी।"

इस मौके पर, केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि एआई पर बहुत बात हो चुकी है। लेकिन, हमारा फोकस ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले हमारे किसान भाइयों को लेकर भी होना चाहिए। किसान जब एआई का इस्तेमाल करे तो वह खेती की फोटो लें और बता पाए कि धान-गेंहू की खेती में कीड़ा लगा है या नहीं। इसमें खाद की जरूरत कब पड़ेगी। इसी तरह स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो छोटी चीजें हैं, उन्हें एआई का इस्तेमाल कर दूर करना होगा। डॉक्टरों को एक-एक आगे चलते हुए शोध करना होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *