चर्चा चालू है। जे पी को अपराधी साबित किया जा रहा है डीप स्टेट का एजेंट बतलाया गया है । सी आई ए ने इन्दिरा गांधी के खिलाफ यह षडयंत्र किया था। जे पी आंदोलन और अन्ना आंदोलन दोनों को जोड़ा जा रहा है क्योंकि दोनों भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन थे। यह भी बतलाया जा रहा है कि जे पी और अन्ना दोनों एक ही जैसे थे।
पत्रकार अजय शुक्ला कह रहे हैं दुनिया के सबसे बड़े गद्दार जे पी और लोहिया थे। इमरजेंसी नहीं लगाई गई होती तो देश टूट गया होता। लोहिया आर एस एस के हाथ में खेल रहे थे ( यह मधु लिमए का नाम लेकर बताया जा रहा है ) । रेलवे हड़ताल को लेकर अनर्गल प्रलाप चल रहा है।
मूर्ख कह रहा है जे पी ,मोरारजी भाई , जॉर्ज फर्नांडिस होटल में जाकर सी आई ए एजेंट से मिला करते थे। एक वक्ता राशि भी बतला रहा है। आपातकाल के पक्ष में और समर्थन में बात की जा रही है। इंदिरा गांधी के चुनाव को रद्द करने वाले जस्टिस
पर आर एस एस और सी आई ए का एजेंट बतलाया जा रहा है। कहा जा रहा है इंदिरा गांधी की इमरजेंसी तानाशाही नहीं थी ।
एक महिला वक्ता कह रही हैं कि जे पी आंदोलन , बोफोर्स कांड निर्भया कांड कांग्रेस की सरकार को अस्थिर करने के लिए उठाया गया था। सौरभ कह रहे हैं इमरजेंसी नहीं लगती तो शेखबदुल रहमान की तरह इंदिरा गांधी की हत्या हो जाती।
वाह,कितनी समझदारी का काम कर रहे हैं । कांग्रेसी वक्तागण ,लोकतंत्र और संविधान को बचाने का यही एकमात्र तरीका सूझ रहा है आयोजकों को। आप ही बतलाएं इमरजेंसी को जायज ठहराने के लिए समाजवादी स्वतंत्रता सेनानियों को गद्दार साबित करने का क्या मकसद हो सकता है ।आज के आपातकाल की जगह
इमरजेंसी की बातचीत कर जेपी लोहिया की चरित्र हत्या करने से कांग्रेस को क्या लाभ होगा?
कांग्रेस को इससे क्या हासिल होगा ?विशेषकर आगामी बिहार चुनाव के संदर्भ में।
कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ,प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी को बतलाना चाहिए कि यह पार्टी का विचार है या व्यक्तिगत विचार ।
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