उपभोक्ता पर दोहरी मार, पैकेट का वजन घटा, नमकीन, स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक्स, माल्टेड खाद्य पेय के बढ़े दाम

नई दिल्ली।

छोटा पैक सस्ता समझकर खरीद रहे हैं तो हकीकत जानकर आपको झटका लगेगा। पिछले एक साल में रोजमर्रा के उत्पाद बनाने वाली (एफएमसीजी) कंपनियों ने पैकेटबंद उत्पादों के दाम 10 फीसदी बढ़ा दिया है। साथ ही इनका वजन भी 15 फीसदी घटा दिया है। इससे उपभोक्ताओं पर महंगाई की दोहरी मार पड़ रही है। केंटर की शोध रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।

कच्चे माल की ऊंची लागत का सारा बोझ उपभोक्ताओं पर
केंटर ने अपने जून एफएमसीजी पल्स अपडेट में कहा कि एफएमसीजी की औसत प्रति किलोग्राम कीमत 10.1 फीसदी बढ़ गई, जबकि औसत पैक आकार लगभग 15 फीसदी कम हो गया। यह लागत बचाने के लिए कंपनियों द्वारा उत्पाद बेचने की नई रणनीति को दर्शाता है। इसमें कंपनियां कच्चे माल की ऊंची लागत का सारा बोझ उपभोक्ताओं पर डाल रही हैं। वहीं कंपनियों की कमाई बढ़ रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि समीक्षाधीन अवधि में खरीदे गए एफएमसीजी पैक की संख्या में 15 फीसदी की वृद्धि हुई। इसमें कहा गया है कि एफएमसीजी कंपनियों ने उच्च मुद्रास्फीति का हल नई रणनीति से निकाल लिया है। केंटर ने कहा कि कुल मिलाकर, 30 अप्रैल 2022 को समाप्त तीन महीनों में एफएमसीजी की मात्रा में साल-दर-साल 1.1 फीसदी की गिरावट आई, जबकि इस क्षेत्र ने नौ फीसदी की मूल्य वृद्धि दर्ज की। अप्रैल में संख्या में 1.4 फीसदी की गिरावट देखी गई, जो पिछले एक साल में लगातार दसवें महीने गिरावट आई है। कच्चे माल की ऊंचा लागत का सभी बोझ कंपनियां उपभोक्ताओं पर डाल रही हैं। इसके लिए‌ वह अलग तरीका अपनाकर खपत को प्रभावित कर रही हैं क्योंकि खरीदार छोटे पैक या या सस्ते ब्रांडों तरजीह देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि परिवारों को भी दिन-प्रतिदिन की वस्तुओं की एक शृंखला में मुद्रास्फीति का सामना करना पड़ रहा है।

इन उत्पादों पर ज्यादा असर

रिपोर्ट के मुताबिक नमकीन, स्नैक्स, शीतल पेय,माल्टेड खाद्य पेय और बालों के तेल जैसी श्रेणियों में कंपनियों ने वजन घटाकर दाम बढ़ाने की रणनीति को विशेष रूप से अपनाया है। व्याकरण में कटौती विशेष रूप से स्पष्ट की गई थी। इसी अवधि में खरीदे गए एफएमसीजी पैक की संख्या में 15 फीसदी की वृद्धि हुई जो यह दर्शाता है कि जैसे-जैसे कीमतें बढ़ीं, उपभोक्ताओं ने छोटे पैक खरीदे।

 

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