महिलाओं का मज़बूती से साथ देने की ज़रूरत

 सुसंस्कृति परिहार

महिलाएं सारी दुनियां में ज्यों ज्यों अपने हुकूक के लिए आगे बढ़ रही हैं तथा दमित शोषित महिलाओं के लिए अपने माध्यम से जागरुक करने के लिए काम कर रहीं हैं उनके पीछे मर्दवादी सोच के लोग कोई ना कोई मुहिम शुरू कर देते हैं ।कभी उन्हें पर  टोल किया जाता है, कभी उनके लिए अपशब्दों का इस्तेमाल होता है तो कभी उनके विरुद्ध फर्जी किस्से गढ़ कर सोशल मीडिया पर इस कदर प्रचारित किया जाता है कि वे भयभीत हो ,ये कार्य छोड़ दें।

फिलहाल ,  हिम्मत और हौसले के साथ सामाजिक कार्य में मुखर मुस्लिम महिलाओं को सुल्ली डील के ज़रिए निशाना बनाया गया है। इनमें 80 जिन मुसलमान महिलाओं को शामिल किया गया है उनमें  पत्रकार, समाजसेवी कार्यकर्ता, कलाकार और शोधार्थी  हैं।’फाइंड योर सुल्ली डील’. इस पर क्लिक करने पर एक मुस्लिम महिला की तस्वीर, उसका नाम और ट्विटर हैंडल की जानकारी यूजर से साझा की जा रही थी। इसी कड़ी में एक जर्नलिस्ट का फोटो और नाम ‘सुल्ली डील्स’ ऐप पर गलत तरीके से उपयोग किया गया। जिस पर संपादकों की संस्था एडीटर गिल्ड्स  आफ इंडिया ने मुस्लिम महिलाओं, महिला पत्रकारों पर हुए इस हमले की निंदा करते हुए कहा है कि सोशल मीडिया और डिज़िटल प्लेटफॉर्म का इस तरह इस्तेमाल कर महिला पत्रकारों को डराने का तरीका चिंतित करने वाला है. इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है और जांच शुरु कर दी है।

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता चिन्मय बिश्वाल ने बताया कि राष्ट्रीय साइबर अपराध रिर्पोटिंग पोर्टल पर मिली एक शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए साइबर सेल ने सात जुलाई को आईसीपी की धारा 354-ए (छेड़छाड़) के तहत मामला दर्ज किया है।  इस मामले में गिटहब एप को नोटिस भेजकर जानकारी मांगी है। साइबर सेल के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी स्तर पर जांच की जा रही है। जांच अभी प्रारंभिक स्तर पर है, इसलिए इस पर अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। महिला आयोग ने भी संज्ञान लिया है।

Sulli Deals ऐप को github नाम के ओपन सोर्स प्लैटफॉर्म पर बनाया गया था. इसमें मुस्लिम महिलाओं की सोशल मीडिया प्रोफाइल खास तौर पर ट्विटर से फोटो लेकर अपलोड किया गया था जिसे अब हटा दिया गया है। विदित हो,सुल्ला या सुल्ली एक अपमानजनक शब्द है, जिसका इस्तेमाल मुस्लमानों के लिए किया जाता है।

ऐसी की ट्रोलिंग का शिकार हुईं शाज़िया रेहाना लिखती हैं कि “हैरत की बात है सुल्ली डील्स एप्प पर मुसलमान ख़ामोश है, वरना अब तक लड़के उस एप्प को बनाने वाले का शजरा निकाल कर डिजिटल लिंचिंग कर डालते। मुझे दो दिन में 6-7 पोस्ट नज़र आईं। जिनमें दो-तीन कॉपी पेस्ट पोस्ट थीं. इन पोस्ट में सुल्ली डील्स की जानकारी के बजाए कोसाई ज़्यादा शामिल थी. उससे भी हैरत की बात है, जिनकी लिस्ट में 90% मुसलमान भरे पड़े हैं, उन्होंने भी पोस्ट को इग्नोर मारा, जबकि दूसरी पोस्ट पर लाइक कॉमेंट्स की गिनती सुल्ली डील्स वाली पोस्ट से कई गुना ज़्यादा थी। वास्तव में ये एक विचारणीय टिप्पणी है।

अतिया जुनैद का कहना भी लाज़मी है वे कहती हैं फिर क्यों बैठाया था मर्द समाज ने सीएए में अपनी औरतों को धरनों पे? घर क्यों ना बैठाया? हमारी माँएं, हमारी बहनें क्रांति ले आईं हैं दुनिया को दिखा रहे थे ये लोग। मुस्लिम समाज की औरत औरत करके छाती चौड़ी कर रहे थे। अब उसके हक़ में बोलना है तो मय्यत पड़ गई है? सब अपने अपने हिसाब से समझा रहे हैं, हम कहना क्या चाह रहे हैं? ये कोई नहीं समझ रहा, अलबत्ता बात ही घूम जा रही है।वे दिलेरी से कहती हैं  अब तो ये तय है मुस्लिम फ़ांडामेंट्लिस्टों से शिकायत भी करेंगे और उनकी बख़िया भी उधेड़ेंगे।

ये हकीकत है कि मुस्लिम महिलाओं ने जिस तरह अपने लिए तरक्की के रास्ते खोले हैं उन पर ज़रा सी आंच अब उन्हें बर्दाश्त नहीं होगी।समाज में सभी को तरक्की पसंद रास्ते का खैरमकदम करना होगा।कहा जा रहा है कि  सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाली मुस्लिम महिलाओं के लिए ये कोई नया नहीं है. ट्रोलिंग का शिकार वो खुद मुसलमानों से होती आईं है, जब वो पर्दे पर या मज़हब पर सवाल करती हैं तो खुलेआम उनकी तस्वीरें शेयर की जाती है । ध्यान रखें यह समस्या सिर्फ मुस्लिम महिलाओं की नहीं प्राय:प्राय: हर समाज का यही हाल है । जो महिलाएं आगे हैं उन्होंने गैर ज़रूरी बंधनों को तोड़कर ही अपनी जगह बनाई है। बहुत कम महिलाएं होंगी जिन्हें परिवार और समाज का साथ मिला होगा ।

दरअसल पितृसत्तात्मक समाज कोई भी हो वह स्त्री को बराबरी का दर्जा देने के पक्ष में आज भी नहीं है। इसलिए महिलाओं से सम्बंधित जब कोई प्रगतिशील विचारों की बात कोई महिला सामने लाती है तो उसे टोल किया  जाता है । ख़तरनाक बात तो तब होती है जब महिला समाज भी इस पर मौन धारण कर लेता है जिनकी राह आसान बनाने में महिलाएं आगे आती हैं।सुल्ली डील्स पर सबको डटकर खड़े होना पड़ेगा वरना यह बीमारी कल किसी और रुप में महिलाओं को परेशान कर सकती है।

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